Friday, 22 February, 2013

कुछ लिखा है...

कुछ किया है,
बहुत करना बाकी है।
कुछ ज़ाहिर किया है,
बहुत कहना बाकी है।  
कुछ लिखा है...
पर गहराईओं को छुना बाकी है।

कुछ सोचा है,
बहुत संजोना बाकी है। 
कुछ देखा है,  
बहुत महसूस करना बाकी है।  
कुछ लिखा है...
पर अक्षरों को ढूंढना बाकी है।

कोई राग छेड़ा है,
पर सुरों को समझना बाकी है।
बहुत सच को सुना है,
पर उसे जीना  बाकी है।
कुछ लिखा है...
पर शब्दों  सजाना बाकी है।

प्यार किया है बहुत,
पर जाताना बाकी है।
प्रेम-पत्र लिखे हैं बहुत,
पर प्रेम का मतलब समझना बाकी है।
कुछ लिखा है...
पर जज़बातों को समझना बाकी  है।

सजदा किया है बहुत,
पर संजीदा होना बाकी है।
ख्वाब देखे हैं बहुत,
पर हकीकत बनाना बाकी है।
कुछ लिखा है...
पर पंक्तियों का तालमेल बाकी है।

बहुत कम किया है,
बहुत करना बाकी है।
बनना है कलमकार,
पर कलम पकड़ना बाकी है।
कुछ लिखा है...
पर भाषा का ज्ञान बाकी है।
ये तो बस शुरुआत है,
अभी आसमान छुना बाकी है।
अर्श पर अपना नाम लिखना बाकी है।


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