Wednesday 28 April 2010

कह दो किनारों से, हमें बह जाना है

कह दो किनारों से, हमें बह जाना है
रोके न हमें, हमें कुछ पाना है
तो क्या हुआ मंजिल ज़रा दूर है
अकेली नाव में एक ही पतवार है
कह दो उन उफानी लहरों से कोई
साहस ही हमारा तराना है
कह दो किनारों से, हमें बह जाना है।
है क्या किसी में इतना दम
रोक ले जो हमारे कदम
डाल दे रोड़े राहों में कोई हज़ार
झुकेगा न एक पल भी इस नाव का कहार
कर दो आगाह उन समुद्री दरिंदो को कोई
आत्मविश्वास से ही ये जग हारा है
कह दो किनारों से, हमें बह जाना है।

चाहे रोक ले इस ज़िन्दगी की सांस कोई
रोक पायेगा न इस सोच की रफ़्तार कोई
कैद कर ले मेरा हर पल कोई
न छु सकेगा मेरे स्वाभिमान को कोई
कह दो उन भयानक समुद्री राहों से कोई
इस कलम को बैखौफ बहते जाना है
कह दो किनारों से, हमें बह जाना है।

ढूंढ़ कर उस मोती को सजाना है अपने हार में
पाकर अमृत को सीना है अपने कंठ में
अपना परचम फहराना है समुद्र के गर्भ में
कह दो उन गरजती बिजलियों से कोई
समुद्र के दिल पर अपना नाम लिखना ही हमारा फ़साना है
कह दो किनारों से, हमें बह जाना है
रोके न हमें, हमें कुछ पाना है।